1-उद्देश्य, प्रयोज्यता एवं नोडल एजेंसी (Outline, Applicability & Nodal Agency)
विधिक आधार एवं पृष्ठभूमि:
यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के “UPERC (Grant of Connectivity to intra-State Transmission System) Regulations, 2010” (तथा इसके समय-समय पर किए गए संशोधनों) के प्रावधानों के अंतर्गत तैयार की गई है। इस SOP का मूल उद्देश्य Intra-State Transmission System (Intra-STS) से जुड़ने के इच्छुक विभिन्न उपयोक्ताओं को एक पारदर्शी, समयबद्ध और संरचित कार्यप्रणाली उपलब्ध कराना है।
प्रयोज्यता (Applicability):
यह SOP राज्य में कार्यरत सभी Generating Companies के Generating Stations (पारंपरिक, Renewable Energy Generating Stations तथा Captive Generating Plants सहित), Renewable Power Park Developers, Energy Storage Systems (ESS), Distribution Licensees, Captive Users, Open Access Consumers, Intra-State Transmission Licensees और State Transmission Utility (STU) पर समान रूप से लागू होती है।
संक्रमण काल के आवेदन (Transition Period Provision):
यदि किसी आवेदक द्वारा Principal Regulations के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था और Amendment Regulations की अधिसूचना तक उसे कनेक्टिविटी प्रदान नहीं की गई थी, तो ऐसे मामलों का निस्तारण Amended Regulations के तहत ही किया जाएगा। ऐसे आवेदकों को नया आवेदन प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी, यद्यपि STU आवश्यकतानुसार अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है।
नोडल एजेंसी (Nodal Agency & Correspondence Details):
Intra-STS से कनेक्टिविटी प्रदान करने तथा इससे जुड़े समस्त तकनीकी व प्रशासनिक मामलों के संचालन हेतु State Transmission Utility (STU) अर्थात् उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPTCL) नोडल एजेंसी है। समस्त पत्राचार एवं आवेदन निम्नलिखित पते पर प्रेषित किए जाएंगे:
Director (Operation), Uttar Pradesh Power Transmission Corporation Limited, 11th Floor, Shakti Bhawan Extension, 14, Ashok Marg, Lucknow – 226001 (Phone: 0522-2287833, Email: stu@upptcl.org)।
परिभाषाएं एवं संदर्भ:
इस SOP में उपयोग किए गए सभी शब्दों और विधिक शब्दावलियों का वही अर्थ माना जाएगा जो Electricity Act, 2003, CEA Technical Standards for Connectivity Regulations, 2007, UPERC Connectivity Regulations, UPERC Open Access Regulations, 2019 तथा UPEGC, 2007 (यथा संशोधित) में परिभाषित हैं।
2-कनेक्टिविटी हेतु पात्रता शर्तें (Eligibility Criteria for Connectivity)
पारंपरिक उत्पादन केंद्र (Conventional Generating Stations):
कोई भी Generating Company जो 5 MW या उससे अधिक स्थापित क्षमता (Installed Capacity) वाले पारंपरिक विद्युत उत्पादन केंद्र का संचालन अथवा रखरखाव करती है, अपने नए, संशोधित अथवा विस्तारित संयंत्र/इलेक्ट्रिकल प्लांट के लिए 33 kV या उससे उच्च वोल्टेज स्तर पर कनेक्टिविटी हेतु आवेदन कर सकती है।
अक्षय ऊर्जा केंद्र एवं ऊर्जा भंडारण प्रणाली (REGS & ESS):
Renewable Energy Generating Station (REGS) बिना ESS के अथवा ESS के साथ, तथा स्वतंत्र Energy Storage System (ESS), जिनकी व्यक्तिगत क्षमता अथवा Lead Generator / Lead ESS के माध्यम से कुल स्थापित क्षमता 5 MW या उससे अधिक हो, सिंगल इंटरकनेक्शन पॉइंट पर 33 kV या उससे अधिक वोल्टेज स्तर पर आवेदन के पात्र हैं।
सह-स्थित अथवा साझा व्यवस्था (Co-located / Shared Facility Connectivity):
ऐसी REGS अथवा ESS इकाइयां जिनकी स्थापित क्षमता 1 MW या उससे अधिक हो, वे Intra-STS से पहले से जुड़ी किसी स्थापित उत्पादन इकाई के Electrical System के माध्यम से 33 kV या उससे अधिक वोल्टेज पर कनेक्टिविटी प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए मूल उत्पादन इकाई के साथ उनके इलेक्ट्रिकल सिस्टम अथवा इंटरकनेक्शन सुविधाओं को साझा करने का वैध विधिक अनुबंध होना अनिवार्य है।
रिन्यूएबल पावर पार्क डेवलपर्स (Renewable Power Park Developers):
5 MW या उससे अधिक की स्थापित क्षमता विकसित करने वाले Renewable Power Park Developers एक सिंगल इंटर-कनेक्शन पॉइंट पर 33 kV या उससे उच्च वोल्टेज स्तर पर कनेक्टिविटी हेतु आवेदन कर सकते हैं।
वितरण लाइसेंसधारी (Distribution Licensees):
डाटा सेंटर पार्क (वितरण लाइसेंसधारी के रूप में) को छोड़कर, सामान्य वितरण लाइसेंसधारी अपने नए, संशोधित अथवा संवर्धित सब-स्टेशन, उत्पादन केंद्र अथवा इलेक्ट्रिक लाइनों के लिए 33 kV या उससे अधिक वोल्टेज स्तर पर कनेक्टिविटी हेतु अधिकृत हैं।
कैप्टिव उपभोक्ता, ओपन एक्सेस उपभोक्ता एवं डाटा सेंटर पार्क:
Captive Users, Open Access Consumers तथा Data Centre Park (वितरण लाइसेंसधारी के रूप में), अपने परिसर में स्थित Main Receiving Substation (MRSS) अथवा इलेक्ट्रिक प्लांट के लिए 132 kV या उससे अधिक वोल्टेज स्तर पर कनेक्टिविटी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उनका मौजूदा अथवा प्रस्तावित लोड न्यूनतम 20 MVA होना अनिवार्य है, भले ही पावर फ्लो का क्वांटम कुछ भी हो।
इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी (Non-STU Transmission Licensees):
Electricity Act की धारा 63 के तहत प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अथवा अन्य माध्यम से कार्यरत होने वाले गैर-STU ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों को कनेक्टिविटी हेतु पृथक आवेदन (FORMAT-CON2) देने की आवश्यकता नहीं है। STU अनुमोदित ट्रांसमिशन योजना के तहत उनके नेटवर्क को मौजूदा Intra-STS से जोड़ेगा। लाइसेंसधारी द्वारा आयोग से लाइसेंस और Transmission Service Agreement (TSA) प्राप्त होते ही STU को सूचित किया जाएगा, जिसके आधार पर STU स्वतः संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई करेगा।
पूर्व से जुड़े उपभोक्ता (Existing Connected Users):
27 अक्टूबर 2010 से पूर्व Intra-STS से जुड़े उपयोक्ताओं को उसी क्षमता के लिए नया आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी, उन्हें डीम्ड कनेक्टेड माना जाएगा। हालांकि, यदि उन्होंने पूर्व में Connection Agreement निष्पादित नहीं किया है, तो उन्हें अनुबंध निष्पादित करना होगा। किसी भी प्रकार के क्षमता विस्तार, लोड वृद्धि अथवा सब-स्टेशन/लाइन ऑग्मेंटेशन की स्थिति में नया आवेदन करना अनिवार्य होगा।
3-आवेदन के साथ संलग्न किए जाने वाले विवरण एवं दस्तावेज (Project Related Information)
सामान्य परियोजना तत्परता एवं वचनबद्धता (Project Preparedness):
आवेदन प्रस्तुत करने से पूर्व आवेदक को प्रोजेक्ट प्लानिंग, डिजाइनिंग और निर्माण-पूर्व की सभी आवश्यक स्वीकृतियां व अनुमतियां पूर्ण करनी होंगी। आवेदक को यह प्रमाणित करना होगा कि कार्य प्रारंभ करने और कमीशनिंग की संभावित तिथियों के साथ वह परियोजना निष्पादन हेतु पूर्ण रूप से तैयार है। इसके साथ ही यह स्पष्ट अंडरटेकिंग देनी होगी कि CEA (Technical Standards for Connectivity to the Grid) Regulations, 2007 के तकनीकी मानकों का पूर्ण अनुपालन किया गया है अथवा किया जाएगा। 33 kV पर जुड़ने वाले मौजूदा डिस्कॉम को इस अंडरटेकिंग से छूट प्राप्त है।
उत्पादन केंद्रों, REGS, ESS एवं रिन्यूएबल पार्कों हेतु आवश्यक तकनीकी व वैधानिक विवरण:
आवेदन के साथ FORMAT-CON1 पर नोटरीकृत हलफनामा (Affidavit) संलग्न करते हुए निम्नलिखित विवरण देने होंगे:
- भूमि अधिग्रहण: कुल आवश्यक भूमि (पर्यावरण स्वीकृति प्रस्ताव के अनुसार), अधिग्रहीत व कब्जे में ली गई भूमि, शेष भूमि की समय-सीमा, Land Acquisition Act के तहत धारा 4, 6 या 17 की अधिसूचनाएं अथवा संयंत्र के उपयोगी जीवनकाल (Useful Life) से अधिक अवधि की पंजीकृत लीज/सेल डीड।
- पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां: Rapid Environmental Impact Assessment (EIA) रिपोर्ट, आवेदन की अद्यतन स्थिति, सक्षम प्राधिकारी का विवरण तथा उठाई गई आपत्तियों का निस्तारण (Connection Agreement पर हस्ताक्षर से पूर्व पूर्ण स्वीकृति अनिवार्य)।
- ईंधन एवं जल लिंकेज: आवश्यक ईंधन की मात्रा, लिंकेज या कोल ब्लॉक आवंटन, ईंधन परिवहन अनुबंध, सिंचाई विभाग अथवा सक्षम प्राधिकारी से जल आवंटन स्वीकृति और वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर अनुबंध।
- मशीनरी एवं निष्पादन अनुबंध: मुख्य संयंत्र व मशीनरी के क्रय आदेश (Supply Orders) अथवा EPC/EPS Contract अवॉर्ड की स्थिति।
- डेडिकेटेड ट्रांसमिशन लाइन एवं उपयोगी जीवन: उत्पादन केंद्र से सब-स्टेशन तक की समर्पित ट्रांसमिशन लाइन का तकनीकी ब्यौरा और संयंत्र का उपयोगी जीवनकाल।
- कमीशनिंग शेड्यूल एवं वाणिज्यिक व्यवस्थाएं: व्यावसायिक संचालन की मूल व संशोधित तिथि (COD) तथा स्टार्ट-अप/बैक-अप पावर की खरीद हेतु संबंधित क्षेत्र के डिस्कॉम अथवा अन्य स्रोतों से किए गए वाणिज्यिक अनुबंध।
- कैप्टिव प्लांट्स के लिए विशिष्ट ब्यौरा: कैप्टिव उपयोग हेतु चिन्हित व गैर-चिन्हित यूनिट्स, प्रत्येक कैप्टिव शेयरधारक की इक्विटी होल्डिंग, उत्पादित विद्युत में उपभोग का प्रतिशत, ड्रॉअल व इंजेक्शन पॉइंट्स और उनके सब-स्टेशन का ब्यौरा।
- पार्क एवं ESS का ब्यौरा: भौगोलिक निर्देशांक (Latitude & Longitude), निकटतम ग्राम, तहसील, जिला और Lead Generator/Lead ESS से संबंधित दस्तावेज।
वितरण लाइसेंसधारियों, कैप्टिव यूजर्स एवं ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं हेतु विवरण:
इस श्रेणी के आवेदकों को भी FORMAT-CON1 पर हलफनामे के साथ भूमि की उपलब्धता (Feasibility Report के आधार पर), वैधानिक स्वीकृतियां (पर्यावरण, वन आदि), उपकरण आपूर्ति आदेश, उपयोगी जीवनकाल और कमीशनिंग शेड्यूल प्रस्तुत करना होगा। इसके अतिरिक्त:
- Distribution Licensee: STU को पूर्व में प्रेषित ट्रांसमिशन प्लानिंग में सब-स्टेशन/लाइन के समावेश की स्थिति, बोर्ड/सक्षम स्तर से अनुमोदन, मौजूदा व प्रस्तावित ट्रांसफार्मर क्षमता, लाइन का कंडक्टर व लंबाई, वर्तमान लोड तथा आगामी 5 वर्षों की Projected Demand का विवरण।
- Captive User: औद्योगिक प्रतिष्ठान का स्वरूप, ग्रिड से ली जाने वाली मौजूदा व अतिरिक्त मांग, 5 वर्षों का लोड प्रोजेक्शन, डिस्कॉम से बैक-अप सप्लाई का अनुबंधित लोड, कैप्टिव प्लांट की भौगोलिक स्थिति, प्राइम मूवर, जनरेशन व स्टेप-अप वोल्टेज, डेडिकेटेड लाइन और इक्विटी स्ट्रक्चर।
- Open Access Consumer: औद्योगिक/व्यावसायिक स्थापना, ट्रांसमिशन प्रणाली के उपयोग की मात्रा, 5 वर्षीय विकास अनुमान, बैक-अप पावर एग्रीमेंट और संबंधित पावर सोर्स का Intra-STS/Inter-STS से जुड़ाव तथा डिलीवरी पॉइंट।
- Data Centre Park (as Discom): अनुमोदित वितरण योजना, ट्रांसफार्मर क्षमता, वर्तमान लोड एवं आगामी 5 वर्षों के लोड का विस्तृत विवरण।
4-ओपन एक्सेस एवं विद्युत विनिमय संबंधी घोषणा (Undertakings & Declarations)
दीर्घकालिक ओपन एक्सेस (LTOA) हेतु बाध्यता:
प्रत्येक आवेदक को UPERC कनेक्टिविटी विनियमों के रेगुलेशन 14.2 के तहत या तो कनेक्टिविटी आवेदन के साथ अथवा कनेक्टिविटी स्वीकृत होते ही Long Term Open Access (LTOA) के लिए औपचारिक आवेदन करना होगा। यद्यपि, ओपन एक्सेस के आवेदन पर विचार और स्वीकृति इस SOP के अंतर्गत कनेक्टिविटी स्वीकृत होने के पश्चात ही की जाएगी।
FORMAT-CON2 के तहत घोषणा की शर्तें:
आवेदक को आवेदन पत्र में स्पष्ट घोषणा करनी होगी। यदि विद्युत क्रय-विक्रय का अनुबंध अस्तित्व में है (कैप्टिव व्यवस्था सहित), तो ट्रांसमिशन सिस्टम के पूर्ण अथवा चरणबद्ध उपयोग का विवरण तथा LTOA व BPTA पर हस्ताक्षर करने वाली अधिकृत संस्था का नाम घोषित करना होगा (भाग-A)। यदि यह लागू नहीं होता, तो आवेदक को घोषणा करनी होगी कि उसका उद्देश्य केवल Intra-STS ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज़्ड या कनेक्टेड रहना है और वह लागू दरों पर देय Reactive Power Exchange के अतिरिक्त ग्रिड के साथ कोई Active Power का विनिमय नहीं करेगा (भाग-B)।
5-आवेदन जमा करने की विधि, समय-सीमा एवं शुल्क संरचना (Application Submission & Fee)
आवेदन जमा करने का माध्यम (Mode of Submission):
आवेदक द्वारा विधिवत भरा हुआ आवेदन पत्र FORMAT-CON2 में, FORMAT-CON1 के नोटरीकृत हलफनामे के साथ सीलबंद लिफाफे पर “Application for Grant of Connectivity to Intra-STS” लिखकर व्यक्तिगत रूप से अथवा डाक द्वारा STU कार्यालय में जमा किया जाएगा। पारंपरिक उत्पादन कंपनियों, REGS, ESS, Co-located सिस्टम और Renewable Power Park Developers के लिए आवेदन अनिवार्य रूप से STU के ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर (Digitally Signed) के माध्यम से जमा करना होगा।
आवेदन की अग्रिम समय-सीमा (Lead Time for Application):
- यदि ट्रांसमिशन प्रणाली में System Strengthening (सब-स्टेशन/लाइन का संवर्धन, आधुनिकीकरण, विस्तार या नया निर्माण) आवश्यक है, तो कार्य प्रारंभ करने से 2 से 4 वर्ष पूर्व आवेदन करना होगा।
- यदि System Strengthening आवश्यक नहीं है, तो कनेक्टिविटी की आवश्यकता से 1 वर्ष पूर्व आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
- सिस्टम सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता का निर्धारण STU द्वारा तकनीकी अध्ययनों के आधार पर किया जाएगा और उसका निर्णय सर्वोपरि व बाध्यकारी होगा।
गैर-वापसी योग्य आवेदन शुल्क (Non-refundable Application Fee):
आवेदक को ट्रांसमिशन प्रणाली के माध्यम से इंजेक्ट अथवा ड्रॉ की जाने वाली विद्युत क्षमता के आधार पर निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा:
- शून्य अथवा 100 MW तक: ₹ 2 लाख
- 100 MW से अधिक तथा 500 MW तक: ₹ 3 लाख
- 500 MW से अधिक तथा 1000 MW तक: ₹ 6 लाख
- 1000 MW से अधिक: ₹ 9 लाख
विशेष रियायती शुल्क: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (RE) पर आधारित 10 MW तक की उत्पादन क्षमता के इंजेक्शन अथवा डिस्कॉम द्वारा 10 MW तक के ड्रॉअल हेतु आवेदन शुल्क मात्र ₹ 10,000/- (₹ 0.10 लाख) होगा। समस्त शुल्कों पर लागू GST अतिरिक्त देय होगा।
भुगतान का विवरण एवं प्रारंभिक जांच (Scrutiny of Application):
आवेदन शुल्क सीधे UPPTCL के बैंक खाते में RTGS के माध्यम से जमा करना होगा (खाता धारक: UP Power Transmission Corporation Limited, बैंक: ICICI Bank, शाखा: हजरतगंज, लखनऊ, खाता संख्या: 628105035856, IFSC: ICIC0006281)। आवेदन के साथ GST नंबर और UTR रसीद संलग्न करना अनिवार्य है।
STU आवेदन प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच करेगा और किसी भी प्रकार की त्रुटि या कमी पाए जाने पर आवेदक को सूचित करेगा। आवेदक को सूचना प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर कमियों को दूर करना होगा। निर्धारित समय में कमियां दूर न करने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और आवेदन शुल्क जब्त कर लिया जाएगा।
6-आवेदन में संशोधन एवं परिवर्तन की प्रक्रिया (Changes in Application)
महत्वपूर्ण परिवर्तन (Material Changes) एवं आवेदन की समाप्ति:
यदि आवेदक द्वारा निम्नलिखित में से कोई भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया जाता है, तो मूल आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा, आवेदन शुल्क जब्त होगा और आवेदक को नया (Fresh) आवेदन प्रस्तुत करना होगा:
- उत्पादन केंद्र, रिन्यूएबल पार्क, ESS, डिस्कॉम सब-स्टेशन अथवा औद्योगिक परिसर के स्थान (Location) में परिवर्तन।
- विद्युत इंजेक्शन (Injection) अथवा ड्रॉअल (Drawl) के बिंदु में परिवर्तन।
- आवंटित की जाने वाली विद्युत क्षमता में परिवर्तन—जो 500 MW तक के मूल आवेदन के लिए 15% से अधिक हो, अथवा 500 MW से अधिक क्षमता के लिए 100 MW से अधिक हो।
- कनेक्टिविटी के वोल्टेज स्तर (Voltage Level) में परिवर्तन।
अनुबंध निष्पादन से पूर्व अथवा उपरांत परिवर्तन:
यदि उपर्युक्त महत्वपूर्ण परिवर्तन कनेक्टिविटी स्वीकृत होने के बाद किंतु Connection Agreement पर हस्ताक्षर से पूर्व किया जाता है, तो STU मूल आवेदन को वापस लेने की अनुमति दे सकता है, किंतु आवेदक द्वारा जमा की गई Connectivity Bank Guarantee जब्त (encash) कर ली जाएगी। Connection Agreement निष्पादित होने के उपरांत कोई भी Material Change अनुमन्य नहीं होगा और ऐसा करने पर अनुबंध स्वतः निरस्त हो जाएगा।
गैर-महत्वपूर्ण परिवर्तन (Non-Material Changes):
महत्वपूर्ण परिवर्तनों के अतिरिक्त अन्य प्रविष्टियों में संशोधन हेतु कनेक्टिविटी स्वीकृति से पूर्व FORMAT-CON2 एवं FORMAT-CON4 (हलफनामे सहित) के माध्यम से Supplementary Application प्रस्तुत की जा सकती है (जिसे Revision No.-X के रूप में चिन्हित किया जाएगा)। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क देय नहीं होगा। यदि STU ऐसे संशोधन को अस्वीकार करता है, तो 15 दिनों के भीतर कारण सहित सूचित करेगा। आवेदक अस्वीकृति के 7 दिनों के भीतर पुनर्विचार हेतु प्रत्यावेदन दे सकता है, जिस पर STU 15 दिनों में अंतिम निर्णय देगा।
7-तकनीकी अध्ययन एवं आवेदन का प्रसंस्करण (Processing of Application & System Studies)
लोड फ्लो एवं इंटर-कनेक्शन अध्ययन:
STU आवेदनों की प्राप्ति के उपरांत विस्तृत लोड फ्लो स्टडीज, सिस्टम फिजिबिलिटी स्टडीज और CEA ग्रिड मानकों के अनुसार इंटर-कनेक्शन अध्ययन करेगा। इसके अंतर्गत ग्रिड की विश्वसनीयता, डिजाइन मार्जिन, मौजूदा LTOA ग्राहकों की मांग और नेटवर्क बाधाओं का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
डाटा की मांग एवं प्राथमिक रिपोर्ट (Preliminary Report):
तकनीकी अध्ययनों के दौरान यदि STU को आवेदक अथवा ग्रिड से जुड़ी अन्य संस्थाओं से अतिरिक्त तकनीकी डाटा की आवश्यकता होती है, तो संबंधित संस्थाओं को 15 दिनों के भीतर वांछित डाटा उपलब्ध कराना होगा। इसके पश्चात STU राज्य व राष्ट्रीय ग्रिड कोड (UPEGC/IEGC) के प्रावधानों के तहत एक Preliminary Study Report तैयार कर आवेदक व संबंधित पक्षों को प्रेषित करेगा।
कनेक्टिविटी योजनाओं का वर्गीकरण:
अध्ययनों और परामर्श प्रक्रिया के आधार पर STU कनेक्टिविटी योजना को दो वर्गों में विभाजित करेगा—(1) System Strengthening के साथ कनेक्टिविटी, अथवा (2) बिना System Strengthening के कनेक्टिविटी। 132 kV या उससे अधिक वोल्टेज स्तर पर संस्थाओं के संयुक्त प्रस्ताव के आधार पर इंटीग्रेशन स्कीम अनुमोदित की जाएगी। विशिष्ट इंटरकनेक्शन शर्तों को Connection Agreement में तथा सुदृढ़ीकरण कार्यों (विस्तार, नई लाइनें और उनके स्वामित्व/रखरखाव का दायित्व) को BPTA / Supplementary BPTA में शामिल किया जाएगा।
8-कनेक्शन ऑफर एवं कनेक्टिविटी बैंक गारंटी (Offer of Connectivity & Bank Guarantee)
कनेक्शन ऑफर जारी करना (Connection Offer):
तकनीकी निर्णय के आधार पर STU आवेदन प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर FORMAT-CON3 पर आवेदक को औपचारिक Connection Offer जारी करेगा। इसमें इंटर-कनेक्शन बिंदु, निष्पादन की शर्तें तथा इंटर-कनेक्शन सुविधाओं की अनुमानित लागत स्पष्ट रूप से दर्ज होगी।
कनेक्टिविटी बैंक गारंटी (Connectivity Bank Guarantee – Conn-BG):
आवेदक को ऑफर पत्र में दिए गए निर्देशों के अनुसार दो भागों में बैंक गारंटी जमा करनी होगी:
- Conn-BG1: इंटर-कनेक्शन सुविधाओं की अनुमानित लागत के समतुल्य राशि हेतु।
- Conn-BG2: मौजूदा ट्रांसमिशन प्रणाली पर अतिरिक्त क्षमता आवंटन हेतु ₹ 5 लाख प्रति MW की दर से।
अधिकतम सीमा (Capping): REGS, ESS, Co-located RE/ESS तथा रिन्यूएबल पार्क डेवलपर्स द्वारा 100 MW से अधिक क्षमता की कनेक्टिविटी मांगने पर Conn-BG2 की अधिकतम राशि 100 MW के समतुल्य (अर्थात् ₹ 5 करोड़) पर सीमित रहेगी।
छूट: Distribution Licensees और Data Centre Parks (डिस्कॉम के रूप में) को Conn-BG2 से पूर्ण छूट प्रदान की गई है।
BG जमा करने की समय-सीमा एवं सैद्धांतिक स्वीकृति (In-Principal Grant):
आवेदक को ऑफर जारी होने के 30 दिनों के भीतर दोनों बैंक गारंटियां प्रस्तुत करनी होंगी। ऐसा न करने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और आवेदन शुल्क जब्त हो जाएगा। BG प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर STU आवेदक को FORMAT-CON3A पर ‘In-Principal Grant of Connectivity’ जारी करेगा और अनुबंध निष्पादित करने का निर्देश देगा।
गैर-STU ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी एवं डिस्कॉम का विशेष प्रावधान:
गैर-STU इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों को बैंक गारंटी जमा करने से छूट प्राप्त है; उनके लिए FORMAT-CON3 पर जारी Connection Offer ही In-Principal Grant माना जाएगा। इसी प्रकार STU-TWC और UPERC द्वारा अनुमोदित ट्रांसमिशन पूंजी निवेश योजनाओं में शामिल 33 kV डिस्कॉम कनेक्टिविटी को Deemed Grant of Connectivity माना जाएगा। आवेदन अस्वीकृत होने की स्थिति में आवेदक को सुनवाई का अवसर देकर 60 दिनों में लिखित कारण सूचित किए जाएंगे।
9-ऑफर की स्वीकृति एवं साइट दायित्व (Acceptance of Offer & Connection Details)
स्वीकृति प्रस्तुत करना (Submission of FORMAT-CON4):
In-Principal Grant of Connectivity (FORMAT-CON3A) जारी होने के 15 दिनों के भीतर आवेदक अथवा ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी को FORMAT-CON4 में मांगी गई तकनीकी जानकारी एवं विवरण STU को प्रस्तुत करना होगा।
निर्णय एवं साइट रिस्पॉन्सिबिलिटी (FORMAT-CON5):
आवेदक द्वारा FORMAT-CON4 जमा किए जाने को ऑफर की बिना शर्त स्वीकृति (Unconditional Acceptance) माना जाएगा। इस विवरण की समीक्षा के पश्चात STU 15 दिनों के भीतर FORMAT-CON5 के माध्यम से अंतिम कनेक्शन विवरण और संबंधित साइट के तकनीकी व प्रशासनिक उत्तरदायित्व (Site Responsibilities) आवेदक को प्रेषित करेगा तथा अनुबंध हस्ताक्षर हेतु संबंधित अधिकारियों को सूचित करेगा।
10-कनेक्शन अनुबंध का निष्पादन (Execution of Connection Agreement)
अनुबंध के पक्षकार (Parties to the Agreement):
Connection Agreement निम्नलिखित पक्षों के मध्य निष्पादित किया जाएगा:
- आवेदक एवं STU (यदि जुड़ाव STU के नेटवर्क से हो)।
- गैर-STU ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी एवं STU।
- वितरण लाइसेंसधारी एवं STU (33 kV डाउनस्ट्रीम कार्यों हेतु)।
- त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement): आवेदक, STU एवं अन्य ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी (यदि कनेक्टिविटी गैर-STU लाइसेंसी के नेटवर्क से हो)।
प्रारूप एवं निष्पादन की समय-सीमा:
अनुबंध FORMAT-CON6 के निर्धारित प्रारूप में निष्पादित किया जाएगा (प्रतिस्पर्धी बोली के मामलों में आयोग द्वारा अनुमोदित प्रारूप मान्य होगा)। In-Principal Grant अथवा Deemed Grant जारी होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर अनुबंध पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। यदि आवेदक इस अवधि में हस्ताक्षर करने में विफल रहता है, तो UPERC विनियमों के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अनुबंध उपरांत वितरण एवं भौतिक जुड़ाव पर प्रतिबंध:
हस्ताक्षर उपरांत STU अनुबंध की एक-एक प्रति State Load Despatch Centre (SLDC) और State Power Committee को प्रेषित करेगा। अनुबंध निष्पादित होने के उपरांत केवल गैर-महत्वपूर्ण संशोधनों को ही संशोधन पत्र के माध्यम से जोड़ा जा सकेगा। यह स्पष्ट रूप से लागू होगा कि जब तक वैध Connection Agreement निष्पादित नहीं हो जाता, तब तक ग्रिड के साथ किसी भी प्रकार का भौतिक जुड़ाव (Physical Connectivity) स्थापित नहीं किया जाएगा।
11-बैंक गारंटी का प्रबंधन एवं वैधता (Validity & Management of Bank Guarantee)
वैधता अवधि (Validity Period):
प्रस्तुत की गई कनेक्टिविटी बैंक गारंटी (Conn-BG1 एवं Conn-BG2) STU द्वारा अनुमोदित प्रारूप में होगी तथा इंटर-कनेक्शन पॉइंट के ऊर्जीकरण (Energization) की वास्तविक तिथि से 45 दिनों बाद तक पूर्णतः वैध रहनी चाहिए।
BG का निस्तारण एवं वापसी (Treatment of BG):
बैंक गारंटी का प्रबंधन, इनकैशमेंट, समायोजन अथवा विमुक्ति UPERC Connectivity Regulations के Regulation 8A में निहित विधिक प्रावधानों के अनुसार ही निष्पादित की जाएगी।
12 & 13-ओपन एक्सेस एवं बल्क पावर ट्रांसमिशन एग्रीमेंट (Open Access & BPTA)
ओपन एक्सेस की पूर्व-शर्त:
कनेक्टिविटी मात्र से विद्युत प्रवाह का अधिकार प्राप्त नहीं होता। जब तक संबंधित पक्ष सक्षम आयोग द्वारा जारी विनियमों के अनुसार वैध Open Access (LTOA/MTOA/STOA) प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक Intra-STS के माध्यम से विद्युत ट्रांसमिशन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
BPTA का निष्पादन (Execution of BPTA):
Intra-STS ग्रिड प्रणाली के दीर्घकालिक उपयोग, ट्रांसमिशन प्रभारों के भुगतान और सिस्टम सुदृढ़ीकरण से जुड़ी देनदारियों के संचालन हेतु STU संबंधित पक्षों के मध्य Bulk Power Transmission Agreement (BPTA) अथवा Supplementary BPTA का निष्पादन सुनिश्चित कराएगा।
14, 15 & 16-निर्माण, प्रचालन एवं रखरखाव के दायित्व (Construction, O&M Responsibilities)
इंटर-कनेक्शन सुविधाओं का निर्माण व स्वामित्व (Inter-connection Facilities):
Captive Users, Open Access Consumers और Data Centre Parks (धारा 2.1(g) के आवेदक) को छोड़कर अन्य सभी आवेदक अथवा ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी Connection Agreement पर हस्ताक्षर होने के 60 दिनों के भीतर इंटर-कनेक्शन सुविधाओं की अनुमानित निर्माण लागत STU या संबंधित ट्रांसमिशन लाइसेंसी को अग्रिम रूप से जमा करेंगे। इन सुविधाओं का स्वामित्व STU अथवा संबंधित ट्रांसमिशन लाइसेंसी में निहित माना जाएगा और इसका Operation & Maintenance (O&M) भी उन्हीं के द्वारा किया जाएगा, जिसका व्यय ट्रांसमिशन प्रभारों (Transmission Charges) का हिस्सा होगा।
उत्पादन केंद्रों की समर्पित ट्रांसमिशन लाइन (Dedicated Transmission Line):
उत्पादक कंपनी इंटर-कनेक्शन पॉइंट तक की अपनी Dedicated Transmission Line का निर्माण, प्रचालन एवं रखरखाव अपने व्यय पर स्वयं करेगी। इस लाइन का निर्माण STU अथवा संबंधित ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी के तकनीकी पर्यवेक्षण (Supervision) में किया जाएगा, जिसके लिए नियामक आयोग द्वारा निर्धारित Supervision Charges आवेदक द्वारा जमा किए जाएंगे।
कमिटेड ट्रांसमिशन लाइन (Committed Transmission Line):
कैप्टिव उपयोक्ताओं, ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं अथवा डाटा सेंटर पार्कों से संबंधित 132 kV और उससे उच्च वोल्टेज की कमिटेड ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण, प्रचालन और रखरखाव आयोग के नियमों और इस कार्यप्रणाली के अनुरूप निष्पादित किया जाएगा।
17-कमीशनिंग, टेस्टिंग एवं सिंक्रोनाइज़ेशन (Commissioning, Metering & Synchronization)
तकनीकी व सुरक्षा मानकों की अनुपालना:
आवेदक एवं संबंधित लाइसेंसधारियों को CEA Grid Standards, CEA Connectivity Regulations, 2007, UPEGC, IEGC, साइबर सुरक्षा मानकों, वॉयस एवं डाटा संचार प्रणालियों (SCADA/PLCC/OPGW), सिस्टम रिकॉर्डिंग इंस्ट्रूमेंट्स और रिएक्टिव पावर कंपंसेशन मानकों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।
इंटरफेस मीटरिंग व्यवस्था (Interface Metering):
मीटरों की स्थापना, परीक्षण, कैलिब्रेशन और डाटा रीडिंग का कार्य CEA (Installation and Operation of Meters) Regulations, 2006, UPEGC और Deviation Settlement Mechanism (DSM) नियमों के अनुरूप किया जाएगा। ओपन एक्सेस व कैप्टिव उपभोक्ताओं के लिए मीटरों का स्थान UPERC विनियमों के अनुसार तय होगा।
कमीशनिंग पूर्व अग्रिम सूचनाएं (Advance Notices):
कार्य निष्पादन के विभिन्न चरणों पर आवेदक को निम्नलिखित समय-सीमा में लिखित सूचना देनी होगी:
- अपने परिसर में निर्माण व स्थापना कार्य पूर्ण होने की सूचना: कम से कम 3 माह पूर्व।
- Dedicated Transmission Line के निर्माण व कमीशनिंग की सूचना (उत्पादन केंद्रों हेतु): कम से कम 3 माह पूर्व।
- ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज़ेशन (Synchronization) की संभावित तिथि: कम से कम 1 माह पूर्व।
अंतिम ऊर्जीकरण एवं औपचारिक घोषणा (Final Energization Notice):
समस्त परीक्षण व निरीक्षण संतोषजनक पाए जाने पर STU द्वारा ग्रिड से ऊर्जीकृत करने हेतु SLDC, आवेदक एवं अन्य संबंधित पक्षों को कम से कम 15 दिनों का अग्रिम नोटिस (15 Days Advance Notice) जारी किया जाएगा। ग्रिड से जुड़ने के बाद किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक विद्युत प्रवाह STU द्वारा कमीशनिंग की औपचारिक घोषणा जारी होने के उपरांत ही अनुमन्य होगा।
18-कनेक्टिविटी उपरांत की गतिविधियां (Post-Connectivity Events)
ग्रिड अनुशासन एवं वाणिज्यिक निपटान:
कनेक्टिविटी स्थापित होने के उपरांत ग्रिड के साथ होने वाला विद्युत विनिमय, ट्रांसमिशन लाइनों व सब-स्टेशनों का सुचारू प्रचालन व रखरखाव CERC, UPERC और CEA के ग्रिड कोड के अनुसार होगा। इसके तहत दैनिक शेड्यूलिंग, डिस्पैच निर्देश, ऊर्जा लेखांकन (Energy Accounting), Deviation Settlement Mechanism (DSM Accounting) और ओपन एक्सेस बिलिंग व सेटलमेंट के समस्त नियमों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
19-कनेक्टिविटी का हस्तांतरण (Transfer of Connectivity)
हस्तांतरण पर प्रतिबंध एवं विधिक प्रक्रिया:
कोई भी उपयोक्ता अथवा आवेदक अपनी स्वीकृत कनेक्टिविटी अथवा उससे जुड़े अधिकारों और दायित्वों को आंशिक या पूर्ण रूप से किसी अन्य व्यक्ति/संस्था को सीधे हस्तांतरित नहीं कर सकता, जब तक कि UPERC विनियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो।
हस्तांतरण की स्थिति में नई संस्था को UPERC नियमों के तहत STU को विधिवत आवेदन करना होगा। STU द्वारा संशोधित कनेक्टिविटी आदेश जारी किए जाने पर नए सिरे से Connection Agreement निष्पादित किया जाएगा। जब तक वैधानिक हस्तांतरण पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक समस्त वित्तीय और विधिक दायित्व मूल आवेदक के ही बने रहेंगे।
20-सामान्य शर्तें, विसंगतियां एवं क्षतिपूर्ति (General Provisions & Indemnification)
विनियामक सर्वोच्चता (Regulatory Priority):
आवेदक, डिस्कॉम अथवा ट्रांसमिशन लाइसेंसी CEA Technical Standards, CEA Communication Regulations, 2020 और संबंधित ग्रिड संहिताओं के पालन हेतु बाध्य होंगे। यदि इस SOP के किसी बिंदु और UPERC Connectivity Regulations के मध्य कोई विरोधाभास या असंगति उत्पन्न होती है, तो UPERC Regulations के प्रावधान ही सर्वोपरि एवं प्रभावी माने जाएंगे।
प्रारूपों में संशोधन एवं प्रविष्टियां:
आवेदन और अनुबंध से जुड़े समस्त प्रारूपों में सभी प्रविष्टियां पूर्ण रूप से भरी जानी अनिवार्य हैं; अप्रासंगिक कॉलम में ‘Nil’ या ‘Not Applicable’ अंकित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर STU नियामक आयोग को सूचित करते हुए प्रारूपों में संशोधन कर सकता है।
पूर्ण क्षतिपूर्ति दायित्व (Indemnification):
आवेदक अथवा संबंधित लाइसेंसी द्वारा STU और SLDC को हर समय सुरक्षित व क्षतिपूर्ति-मुक्त (Indemnified and Harmless) रखा जाएगा। कनेक्टिविटी के परिणामस्वरूप, निर्माण कार्य के दौरान अथवा संचालन काल में किसी व्यक्ति की मृत्यु, शारीरिक क्षति, संपत्ति के नुकसान, मुकदमों, दावों, अदालती खर्चों, अधिवक्ता शुल्क अथवा तीसरे पक्ष के प्रति उत्पन्न किसी भी विधिक या वित्तीय देनदारी के लिए आवेदक स्वयं उत्तरदायी होगा और STU/SLDC पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
Procedure for Grant of Connectivity to Intra-STS (Revision No.-01)
Format CON-1 से CON-6 का विस्तृत विवरण तालिका
| प्रारूप (Format) | प्रारूप का नाम | जारीकर्ता / प्रस्तुतकर्ता | समय-सीमा (Timeline) | मुख्य उद्देश्य एवं विवरण |
|---|---|---|---|---|
| FORMAT-CON1 | Affidavit (शपथ पत्र / हलफनामा) | आवेदक (Applicant) | मूल आवेदन (FORMAT-CON2) अथवा संशोधन के साथ संलग्न | आवेदक द्वारा परियोजना संबंधी दी गई समस्त जानकारियों (भूमि, पर्यावरण/वन स्वीकृति, तकनीकी डाटा आदि) की सत्यता का नोटरीकृत प्रमाणीकरण। |
| FORMAT-CON2 | Application for Grant of Connectivity (मूल आवेदन पत्र) | आवेदक (Applicant) | System Strengthening आवश्यक होने पर 2-4 वर्ष पूर्व; अन्यथा 1 वर्ष पूर्व | Intra-STS से जुड़ने हेतु औपचारिक आवेदन; इसमें क्षमता (MW), वोल्टेज (kV), लोकेशन, ड्रॉअल/इंजेक्शन पॉइंट और LTOA घोषणाएं शामिल होती हैं। |
| FORMAT-CON3 | Connection Offer (कनेक्शन प्रस्ताव पत्र) | STU (UPPTCL) | आवेदन प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर | Point of Connectivity, इंटर-कनेक्शन सुविधाओं की अनुमानित लागत तथा 30 दिनों में Bank Guarantee (Conn-BG1 व Conn-BG2) जमा करने का औपचारिक निर्देश। |
| FORMAT-CON3A | In-Principal Grant of Connectivity (सैद्धांतिक स्वीकृति पत्र) | STU (UPPTCL) | बैंक गारंटी (Conn-BG) प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर | कनेक्टिविटी की सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान करना तथा आवेदक को आगामी 15 दिनों में बिना शर्त स्वीकृति (FORMAT-CON4) प्रस्तुत करने का निर्देश देना। |
| FORMAT-CON4 | Acceptance of In-Principal Grant (ऑफर की बिना शर्त स्वीकृति) | आवेदक (Applicant) | FORMAT-CON3A जारी होने के 15 दिनों के भीतर | सैद्धांतिक स्वीकृति की बिना शर्त पुष्टि तथा परियोजना से संबंधित विस्तृत तकनीकी डाटा व दस्तावेज STU को सौंपना। |
| FORMAT-CON5 | Connection Details & Site Responsibilities (कनेक्शन विवरण एवं साइट उत्तरदायित्व) | STU (UPPTCL) | FORMAT-CON4 प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर | इंटर-कनेक्शन पॉइंट का अंतिम तकनीकी ब्यौरा तथा साइट पर दोनों पक्षों के परिचालन व रखरखाव (O&M) संबंधी उत्तरदायित्व तय करना। |
| FORMAT-CON6 | Connection Agreement (कनेक्शन अनुबंध) | आवेदक एवं STU / अन्य ट्रांसमिशन लाइसेंसी | FORMAT-CON3A जारी होने के 45 दिनों के भीतर | वैधानिक अनुबंध निष्पादित करना; इसके हस्ताक्षर के बिना ग्रिड से कोई भौतिक जुड़ाव (Physical Connectivity) संभव नहीं है। |