Annual Transmission Charges

ATC – Annual Transmission Charges वह वार्षिक शुल्क है जो ट्रांसमिशन नेटवर्क का उपयोग करने के लिए ट्रांसमिशन कंपनी को दिया जाता है। इसे सरल भाषा में ऐसे समझें कि बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए जो हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें और सबस्टेशन बने होते हैं, उनके निर्माण, संचालन और रखरखाव की लागत पूरे वर्ष में जितनी होती है—उसे ATC कहा जाता है।

ट्रांसमिशन कंपनी (PGCIL, STU, या कोई TBCB विजेता कंपनी) इन लाइनों का निर्माण करती है, उन्हें चालू रखती है, मरम्मत करती है, सुरक्षा सुनिश्चित करती है और पूरे वर्ष सिस्टम की उपलब्धता 98–99% तक बनाए रखती है। इस पूरे काम के बदले उसे निश्चित वार्षिक शुल्क मिलता है, जिसे Annual Transmission Charges कहा जाता है। इस ATC की गणना CERC/SERC के नियमानुसार की जाती है, जिसमें Return on Equity, O&M खर्च, Depreciation, Interest on Loan और Working Capital शामिल होते हैं।

ATC का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ट्रांसमिशन कंपनी को बिजली की मात्रा पर भुगतान नहीं मिलता, बल्कि उपलब्धता पर मिलता है। उदाहरण के लिए, चाहे लाइन से 1000 MW गुजरे या 100 MW, ट्रांसमिशन कंपनी को उसका ATC पूरा मिलेगा—बशर्ते उसने निर्धारित उपलब्धता (Availability) हासिल कर ली हो। यदि उपलब्धता नियत मानक से कम रहती है, तो ATC में कटौती (Penalty) भी की जाती है।

सभी राज्यों के DISCOM और बड़े उपभोक्ता ट्रांसमिशन नेटवर्क का उपयोग करते हैं; इसलिए वे ATC का साझा भुगतान करते हैं। Inter-State Transmission के लिए PGCIL को भुगतान किया जाता है, जबकि Intra-State Transmission के लिए संबंधित STU (जैसे UPPTCL, GETCO, MSETCL आदि) को ATC दिया जाता है। यही ATC बिजली टैरिफ में “Transmission Charges” के रूप में दिखाई देता है।

संक्षेप में, ATC वह वार्षिक शुल्क है जो ट्रांसमिशन नेटवर्क को टिकाऊ, सुरक्षित और हमेशा उपलब्ध रखने के लिए ट्रांसमिशन कंपनी को दिया जाता है। यह बिजली की आपूर्ति श्रृंखला का आवश्यक और अनिवार्य अंग है।