Working Capital

Working Capital बिजली क्षेत्र में वह धनराशि है जो किसी DISCOM, ट्रांसमिशन कंपनी या जनरेटिंग कंपनी को अपने दैनिक संचालन (day-to-day operations) सुचारू रखने के लिए चाहिए होती है। सरल भाषा में, Working Capital वह पूंजी है जिससे कंपनी अपने रोज़ के खर्च—जैसे बिजली खरीद की अग्रिम राशि, वेतन, मेंटेनेंस, मरम्मत, बिलिंग-कलेक्शन, स्पेयर पार्ट्स, और अन्य अल्पकालिक जरूरतें—पूरी करती है।

बिजली क्षेत्र में नकदी का प्रवाह (cash flow) अक्सर असंतुलित होता है। उदाहरण के लिए, DISCOM को बिजली खरीदने के लिए तुरंत भुगतान करना पड़ता है, लेकिन उपभोक्ताओं से भुगतान बाद में मिलता है। इसी तरह, ट्रांसमिशन कंपनी को O&M खर्च हर महीने करने पड़ते हैं, जबकि उसका ATC भुगतान तिमाही या वार्षिक रूप से आता है। इस अंतर को संभालने के लिए Working Capital की आवश्यकता पड़ती है ताकि कंपनी बिना रुकावट के अपनी सेवाएँ देती रहे।

नियामक आयोग (SERC/CERC) Working Capital की गणना का एक निश्चित तरीका तय करते हैं। इसमें आमतौर पर शामिल होता है—एक महीने का O&M खर्च, बिजली खरीद की लागत (DISCOMs के लिए), दो महीने के बकाया, एक महीने का कर्मचारी वेतन, आवश्यक इन्वेंट्री जैसे तेल, केबल, फ्यूज़, ब्रेकर पार्ट्स, और बैंक में न्यूनतम बैलेंस। इस Working Capital पर जिस दर से कंपनी ब्याज देती है, उसे Interest on Working Capital कहा जाता है, और यह भी ARR (Annual Revenue Requirement) में शामिल होता है।

कई DISCOMs की वित्तीय स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें Working Capital के लिए बैंक से ओवरड्राफ्ट या अल्पकालिक ऋण लेना पड़ता है, जो महँगा होता है और उनकी वित्तीय सेहत पर अतिरिक्त बोझ डालता है। यदि सब्सिडी भुगतान देर से हो, बिलिंग कलेक्शन कमजोर हो, या AT&C losses अधिक हों, तो Working Capital की जरूरत और भी बढ़ जाती है।

संक्षेप में, Working Capital वह चल पूंजी है जिससे बिजली कंपनियाँ अपने रोज़मर्रा के खर्चों को संभालती हैं, ताकि बिजली आपूर्ति, मेंटेनेंस, बिलिंग और संचालन बिना किसी रुकावट के चलते रहें। यह बिजली प्रणाली के निरंतर, विश्वसनीय और कुशल संचालन का अनिवार्य वित्तीय आधार है।